संज्ञा

हिंदी व्याकरण

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किसी भी व्यक्ति, वस्तु, जाति, भाव या स्थान के नाम को ही संज्ञा कहते हैं। जैसे – मनुष्य (जाति), अमेरिका, भारत (स्थान), बचपन, मिठास(भाव), किताब, टेबल(वस्तु) आदि।

संज्ञा का शाब्दिक अर्थ होता है : जैसे – राम, वाराणसी, महल, बहादुरी, रामायण आदि।

संज्ञा के उदाहरण:

रमेश परीक्षा में प्रथम आया था। इसलिए वह दौड़ता हुआ स्कूल से घर पहुंचा, इस बात से वह बहुत खुश था। उसने यह बात अपने माता- पिता को बताई। यह समाचार सुन वह इतने आनंदित हुए कि उन्होंने उसे गले लगा लिया।

यहाँ पर खुश और आनंदित (भाव ), रमेश , माता-पिता (व्यक्ति), स्कूल,घर (स्थान ), सुन, गले (क्रिया ) आदि संज्ञा आई हैं।

संज्ञा के भेद

हिन्दी में मुख्य रूप से संज्ञा के पाँच भेद माने जाते है (संज्ञा के तीन मुख्य भेद होते हैं)

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा: गुलाब, दिल्ली, इंडिया गेट, गंगा, राम आदि
  2. भाववाचक संज्ञा: सुंदरता, इमानदारी, प्रशन्नता, बईमानी आदि
  3. जातिवाचक संज्ञा:  गधा, क़िताब, माकन, नदी आदि. जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद माने जाते है ।
    1. समूहवाचक संज्ञा
    2. द्रव्यवाचक संज्ञा

१. व्यक्तिवाचक संज्ञा

व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)

जो शब्द केवल एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं उन शब्दों को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। जिस शब्द से किसी एक विशेष व्यक्ति,वस्तु या स्थान आदि का बोध होता है, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते है। अथार्त जिस संज्ञा शब्द से किसी विशेष स्थान, वस्तु,या व्यक्ति के नाम का पता चले वहाँ पर व्यक्तिवाचक संज्ञा होती है। जैसे- भारत, चीन (स्थान), किताब, साइकिल (वस्तु), सुरेश,रमेश,महात्मा गाँधी (व्यक्ति) आदि।

जैसे:

(अ) व्यक्ति :- राम , सीता , सोहन , अर्जन , रजनी कपिल चेतन ।
(ब) वस्तु :- रामायण , ऊषा पंखा , रीटा मशीन।
(स) स्थान : – सीकर , गंगा , हिमालय , हवामहल

जैसे: राम, कृष्ण, सीता, गंगा, यमुना, गोदावरी, काशी, कलकत्ता, दिल्ली, हिमालय, सतपुडा आदि।

व्यक्तिवाचक संज्ञा के अन्य उदाहरण

  • रमेश बाहर खेल रहा है।
  • महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट खेलते हैं।
  • मैं भारत में रहता हूँ।
  • महाभारत एक महान ग्रन्थ है।
  • अमिताभ बच्चन कलाकार हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में रमेश, महेंद्र सिंह धोनी, भारत, महाभारत, व अमिताभ बच्चन संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराते हैं।

व्यक्तिवाचक संज्ञा की पहचा:

  • (i) व्यक्तियों के नाम – कालिदास, अर्जुन, शेक्सपीयर
  • (ii) दिशाओं के नाम – उत्तर, दक्षिण, पूर्व पश्चिम
  • (iii) देशों के नाम – अमरीका, भारत, भूटान, नेपाल
  • (iv) पहाड़ों के नाम – हिमालय, गोवर्धन, विन्ध्याचल
  • (v) समुद्रों के नाम – हिन्द, प्रशान्त, भूमध्य सागर
  • (vi) नदियों के नाम – गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा
  • (vii) दिनों के नाम – सोमवार, मंगलवार, बुधवार
  • (viii) महीनों के नाम – जनवरी, फरवरी, चैत्र, बैशाख
  • (ix) पुस्तकों के नाम – रामायण, गीता, बाईबल, गोदान
  • (X) समाचार पत्रों के नाम – राजस्थान पत्रिका, पंजाब केसरी
  • (xi) त्योहारों उत्सवों के नाम – होली, ईद, क्रिसमस, स्वतंत्रता दिवस
  • (xii) नगरों के नाम – सीकर, जयपुर, प्रयास, कोटा
  • (xiii) सड़कों/चौकों के नाम – ग्रांड ट्रक रोड, लालचौक ।
  • (xiv) ऐतिहासिक युद्धों के नाम – पानीपत/हल्दीघाटी का युद्ध
  • (xv) राष्ट्रीय जातियों के नाम – पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, भूटानी

२. जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं, उन शब्दों को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जिस शब्द से एक ही जाति के अनेक प्राणियो या वस्तुओं का बोध हो ,उसे जातिवाचक संज्ञा कहते है। जैसे- मोबाइल, टीवी (वस्तु), गाँव, स्कूल (स्थान), आदमी, जानवर (प्राणी) आदि।

जिस शब्द से एक ही जाति के अनेक प्राणियों, वस्तुओं का बोध हो उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। अथार्त जिस शब्द से किसी जाति का सम्पूर्ण बोध होता हो यह उसकी पूरी श्रेणी और पूर्ण वर्ग का ज्ञान होता है। उस संज्ञा शब्द को जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे – कलम, पुस्तक, दूध, कुर्सी, घर, विद्यालय, सड़क, बाग़, पहाड़, कुत्ता, हाथी, गाय, बैल आदि।

जातिवाचक संज्ञा के अन्य उदाहरण

  • स्कूल में बच्चे पढ़ते हैं।
  • बिल्ली चूहे खाती है।
  • पेड़ों पर पक्षी बैठे हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में बच्चे, चूहे, पक्षी जातिवाचक संज्ञा शब्द कहलायेंगे क्योंकि ये किसी विशेष बच्चे या पक्षी का बोध न कराकर सभी बच्चो व पक्षियों का बोध करा रहे हैं।

जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत निम्नलिखित दो है:

  • (क) द्रव्यवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी चीज़ या पदार्थ की अवस्था, दशा या भाव का बोध कराते हैं, उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- बचपन, बुढ़ापा, मोटापा, मिठास आदि।

भाववाचक संज्ञा के उदाहरण

ज्यादा दोड़ने से मुझे थकान हो जाती है।

लगातार परिश्रम करने से सफलता मिलेगी।

ऊपर दिए गए वाक्यों में थकान से थकने का भाव व सफलता से सफल होने का भाव व्यक्त हो रहा है इसलिए ये भाववाचक संज्ञा शब्द हैं।

  • (ख) समूहवाचक संज्ञा

    जो शब्द किसी समूह या समुदाय का बोध कराते है, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।

    जैसे – भीड़, मेला, कक्षा, समिति, झुंड आदि समूहवाचक संज्ञा हैँ।

व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग:

व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ कभी कभी ऐसे व्यक्तियों की ओर इशारा करती हैं, जो समाज में अपने विशेष गुणों के कारण प्रचलित होते हैं। उन व्यक्तियों का नाम लेते ही वे गुण हमारे मस्तिष्क में उभर आते है, जैस-

हरीशचंद्र (सत्यवादी), महात्मा गांधी (मकात्मा), जयचंद (विश्वासघाती), विभीषण (घर का भेदी), अर्जुन (महान् धनुर्धर) इत्यादि। कभी कभी बोलचाल में हम इनका इस्तेमाल इस प्रकार कर लेते हैं-

1. इस देश में जयचंदों की कमी नहीं । (जयचंद- देशद्रोही के अर्थ में)
2.  कलियुग में हरिशचंद्र कहां मिलते हैं । (हरिशचंद्र- सत्यवादी के अर्थ में प्रयुक्त)
3.  हमेँ देश के विभीषणों से बचकर रहना चाहिए । (विभीषण- घर के भेदी के अर्थ में प्रयुक्त)

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग:

कमी-कभी जातिवाचक संज्ञाएँ रूढ हो जाती है । तब वे केवल एक विशेष अर्थ में प्रयुक्त होने लगती हैं-

जैसे: पंडितजी हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे।
यहाँ ‘पंडितजी’ जातिवाचक संज्ञा शब्द है, किंतु भूतपूर्व प्रधानमंत्री ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू’ अर्थात् व्यक्ति विशेष के लिए रूढ़ हो गया है । इस प्रकार यहाँ जातिवाचक का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग किया गया है।

राष्ट्रपिता गांधी जी ने हरिजनों का उद्धार किया । (राष्ट्रपिता गांधी)
नेता जी ने कहा- “तुम मुझे खून दे, मैं तुम्हें आजादी कूँरा । (नेता जी – सुभाष चंद्र बोस)

३. भाववाचक संज्ञा

जिस संज्ञा शब्द से किसी के गुण, दोष, दशा, स्वभाव, भाव आदि का बोध होता हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते है। भाववाचक संज्ञाओं का संबंध हमारे भावों से होता है । इनका कोई रूप या आकार नहीं होता । ये अमूर्त (अनुभव किए जाने वाले) शब्द होते है। अथार्त जिस शब्द से किसी वस्तु , पदार्थ या प्राणी की दशा , दोष, भाव , आदि का पता चलता हो वहाँ पर भाववाचक संज्ञा होती है।

जैसे – भूख, प्यास, थकावट, चोरी, घृणा, क्रोध, सुंदरता, सच्चाई , ईमानदारी, गर्मी, वीरता, लड़कपन, सुख, बुढ़ापा, हरियाली, जवानी, गरीबी आदि।

भाववाचक संज्ञाओं का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग :
भाववाचक संज्ञाएँ जब बहुवचन में प्रयोग की जाती है, तो वे जातिवाचक संज्ञाएँ बन जाती हैं ; जैसे –

(क) बुराई से बचो । ( भाववाचक संज्ञा)
बुराइयों से बचो । (जातिवाचक संज्ञा)
(ख) घर से विद्यालय की दूरी अधिक नहीं है। (भाववाचक संझा)
मेरे और उसके बीच दूरियाँ बढ़ती जा रही है । (जातिवाचक संज्ञा)

भाववाचक संज्ञा बनाना:

भाववाचक संज्ञा चार प्रकार से बनाई जा सकती हैं – 1. जातिवाचक संज्ञा से 2. सर्वनाम से 3. विशेषण से 4. क्रिया से

1. जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा बनाना :-

मित्र = मित्रता पुरुष = पुरुषत्व पशु = पशुता पंडित = पांडित्य
दनुज = दनुजता सेवक = सेवा नारी = नारीत्व भाई = भाईचारा

2. सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना :- पराया = परायापन सर्व = सर्वस्व निज = निजत्व

3. विशेषण से संज्ञा बनाना :- मीठा = मिठास मधुर = मधुरता चौड़ा = चौडाई गंभीर = गंभीरता मूर्ख = मूर्खता पागल = पागलपन
भला = भलाई लाल = लाली

4. क्रिया से भाववाचक संज्ञा बनाना :- उड़ना = उडान लिखना = लेख खोदना = खुदाई बढ़ना=बाढ़ कमाना = कमाई घेरना = घेरा खपना = खपत
बचना =बचाव नाचना = नाच पड़ना = पड़ाव लूटना = लूट

४. समूहवाचक संज्ञा

जिन संज्ञा शब्दों से किसी भी व्यक्ति या वस्तु के समूह का बोध होता है, उन शब्दों को समूहवाचक या समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- भीड़, पुस्तकालय, झुंड, सेना आदि। इसे समुदायवाचक संज्ञा भी कहा जाता है। अथार्त जो शब्द किसी विशिष्ट या एक ही वस्तुओं के समूह या एक ही वर्ग व् जाति के समूह को दर्शाता है वहाँ पर समूहवाचक संज्ञा होती है।

जैसे: भीड़,सेना, जुलुस, खेल, गेंहू का ढेर, लकड़ी का गट्ठर, विद्यार्थियों का समूह आदि।

समुदायवाचक संज्ञा के उदाहरण

  • भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेना है।
  • कल बस स्टैंड पर भीड़ जमा हो गयी।
  • मेरे परिवार में चार सदस्य हैं।

ऊपर दिए गए वाक्यों में सेना, भीड़ व परिवार एक समूह का बोध करा रहे हैं इसलिए ये समुदायवाचक संज्ञा कहलायेंगे।

५. द्रव्यवाचक संज्ञा

जो संज्ञा शब्द किसी द्रव्य, पदार्थ या धातु आदि का बोध कराते है, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है। अथार्त जो शब्द किसी पदार्थ, धातु और द्रव्य को दर्शाते हैं वहाँ पर द्रव्यवाचक संज्ञा होती है।

जैसे: गेंहू, तेल, स्टील, घी, सोना, चाँदी, दही, दूध, पानी, लकड़ी आदि।

द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण

  • मेरे पास सोने के आभूषण हैं।
  • एक किलो तेल लेकर आओ।
  • मुझे दाल पसंद है।

ऊपर दिए गए वाक्यों में सोने, तेल और दाल शब्दों से किसी द्रव्य का बोध हो रहा है इसलिए ये द्रव्यवाचक संज्ञा कहलाते हैं।

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