हिंदी व्याकरण

सभी Competitive Exam के लिए Android App

“संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की जाति (स्त्री या पुरूष ) के भेद का बोध होता हो, उसे लिंग कहते है।

हिन्दी व्याकरण में लिंग के दो भेद होते है:

  • १. पुलिंग
  • २. स्त्रीलिंग

. पुलिंग

जिस संज्ञा शब्द से पुरूष जाति का बोध होता है,उसे पुलिंग कहते है। जैसे -पिता, राजा, घोड़ा, कुत्ता, बन्दर, हंस, बकरा, लड़का आदि।

  • पर्वतों के नाम पुलिंग होते है। जैसे -हिमालय, विन्द्याचल, सतपुडा आदि।
  • देशों के नाम हमेशा पुलिंग होते है। जैसे – भारत, चीन, इरान, अमेरिका आदि।
  • महीनो के नाम हमेशा पुलिंग होते है । जैसे – चैत, वैसाख , जनवरी, फरवरी आदि।
  • दिनों के नाम हमेशा पुलिंग होते है । जैसे – सोमवार, बुधवार, शनिवार आदि।
  • नक्षत्र -ग्रहों के नाम पुलिंग होते है । जैसे -सूर्य, चन्द्र, राहू, शनि आदि।
  • ”अ’ से अंत होने वाले शब्द पुलिंग होते है तथा “ई’, आई, इन, इया आदि से समाप्त होने वाले शब्द स्त्रीलिंग होते है।
  • धातुओं, अनाज, द्रव्य, पदार्थ तथा शरीर के अंगो के नाम पुलिंग होते है। जैसे -सोना, तांबा, पानी, तेल, दूध, आदि।
  • कुछ संज्ञा शब्दों में मादा या नर लगाकर लिंग का प्रयोग किया जाता है।
    भेडिया – मादा भेडिया
    नर खरगोश -मादा खरगोश
    नर छिपकली – मादा छिपकली

२.स्त्रीलिंग

जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते है। जैसे – माता, रानी, घोड़ी, कुतिया, बंदरिया, हंसिनी, लड़की, बकरी आदि। प्राणीवाचक संज्ञाओ का लिंग निर्णय आसान है,परन्तु अप्राणीवाचक (वस्तु) संज्ञाओ के लिंग निर्णय में परेशानी होती है, क्योंकि हिन्दी व्याकरण में निर्जीव वस्तुओं को भी पुरूष या स्त्री लिंगो में बाटा जाता है। प्रायः प्रयोग या आवश्यकता के आधार पर लिंग की पहचान हो जाती है,फिरभी कुछ ऐसे प्राणीवाचक शब्द होते है,जिन्हें हमेशा स्त्रीलिंग तथा पुलिंग में ही प्रयोग किया जाता है। कुछ संज्ञा शब्द इन नियमों के अपवाद भी होते है।

  • नदियों के नाम स्त्रीलिंग है । जैसे –गंगा, गोदावरी, यमुना, सरस्वती आदि ।
    अपवाद – सोन, ब्रह्मपुत्र, सतलज, व्यास, झेलम, सिन्धु ।
    नोट- सोन, ब्रह्मपुत्र आदि के साथ नदी जोड़ने से वे स्त्रीलिंग मे प्रयुक्त होगें ।
  • स्त्रियों के नाम स्त्रीलिंग होते है । जैसे – रमा, दया, भावना, शिल्पा, दिव्या आदि ।
  • तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते है । जैसे – पहली, दूसरी आदि ।
  • भाषाओं के नाम स्त्रीलिंग होते है ।जैसे – हिन्दी, अँग्रेजी, संस्कृत आदि ।
  • नक्षत्रों के नाम स्त्रीलिंग होते है ।जैसे – पृथ्वी, रोहिणी, अश्विनी आदि ।
  • आकारान्त तत्सम संज्ञाएँ प्राय; स्त्रीलिंग होती है । जैसे – समा, दया, भाषा, परीक्षा आदि ।
  • इकारान्त तत्सम संज्ञाएँ प्राय; स्त्रीलिंग होती है ।जैसे – अग्नि, शक्ति, जाति, हानि आदि । अपवाद – मति, कवि, रवि आदि ।
  • उकारान्त तत्सम संज्ञाएँ प्राय; स्त्रीलिंग होती है । जैसे – आयु, वायु, वस्तु आदि ।
  • हिन्दी ईकारान्त संज्ञाएँ प्राय; स्त्रीलिंग होती है । जैसे- नदी, चाँदी, हँसी, बोली आदि ।
    अपवाद – मोती, पानी, घी, हाथी आदि ।
  • ‘इमा’ तद्धित प्रत्यय वाले संस्कृत शब्द स्त्रीलिंग होते है । जैसे – महिमा, गरिमा आदि ।
  • संस्कृत के ‘या’ अथवा ‘सा’ वाले शब्द स्त्रीलिंग होते है । जैसे – विद्या, क्रिया, पिपासा, मिमांसा आदि।
  • १२. संस्कृत की वे संज्ञाएँ जिनके अन्त मे ‘अना’ प्रत्यय होता है स्त्रीलिंग कहलाती है । जैसे – भावना, सुचना आदि ।
  • हिन्दी की धातुओं से ‘अ’ प्रत्यय लगाकर बनी संज्ञाएँ स्त्रीलिंग होती है । जैसे – चहक, कूक, पकड़, पहुँच आदि ।अपवाद – खेल, नाँच, बोल, मेल उतार आदि ।
  • अरबी फारसी के शब्द जिनके अन्त मे ‘श’ प्रत्यय होता है, स्त्रीलिंग होते है । जैसे – पालिश, मालिश, तलाश आदि ।
  • अरबी फारसी के शब्द जिनके अन्त मे ‘त’ प्रत्यय होता है, स्त्रीलिंग होते है । जैसे – इज्जत, कीमत, नफरत, दौलत आदि ।
  • अरबी फारसी की वे संज्ञाएँ जिनके अन्त मे ‘आ’ अथवा ‘ह’ होता है ,स्त्रीलिंग होती है । जैसे – दया, हवा, राह, माह आदि ।
  • वे भाववाचक संज्ञाएँ जिनके अन्त मे ‘ट’ ‘बट’ या ‘हट’ होता है ,स्त्रीलिंग होती है । जैसे – खटपट, सरपट, बनावट, लिखावट, चिल्लाहट आदि ।
  • स्त्रीलिंग प्राणी शब्द – कोयला, चील, मैना आदि ।
  • नीचे लिखे संस्कृत के शब्द हिन्दी मे सदा स्त्रीलिंग मे पयुक्त होते है – विधि, तिथि, निधि, विजय, महिमा, मृत्यु, राशि, ऋण, मणि, अग्नि, समाधि, समिति, सभा, संसद, पुलिस, सेना, भीड़, जनता, पार्टी, कक्षा, जाति, कांग्रेस आदि ।


कुछ प्राणीवाचक शब्द हमेशा पुलिंग या स्त्रीलिंग में ही प्रयुक्त होते है।

  • (अ) पुलिंग – कौवा ,खटमल,गीदड़ ,मच्छर ,चीता,चीन,उल्लू आदि।
  • (ब ) स्त्रीलिंग – सवारी ,गुडिया ,गंगा ,यमुना ।

नोट – जिस संज्ञा शब्द का लिंग ज्ञात करना हो ,उसे पहले बहुवचन में बदल लिजिए। बहुवचन में बदल लेने पर यदि शब्द के अंत में “एँ” या “आँ” आता है,तो वह शब्द स्त्रीलिंग है, यदि एँ या आँ नही आता, तो वह शब्द पुलिंग है ।

उदाहरण:

पंखा – पंखे – आँ या एँ नही आया-पुलिंग
चाबी – चाबियाँ – आँ आया है – स्त्रीलिंग

हिंदी व्याकरण 

हिन्दी वर्णमाला | भाषा, लिपि और व्याकरण | संज्ञा | सर्वनाम | वचन | लिंग | क्रियाविशेषण | कारक | काल | समास | अलंकार | पर्यायवाची | क्रियाविशेषण | विलोम शब्द | समुच्चयबोधक | सम्बन्धबोधक | विस्मयादिबोधक अव्यय | अनेक शब्दों के एक शब्द | प्रत्यय | हिंदी संख्या | मुहावरे | संधि | उपसर्ग | समरूप भिन्नार्थक शब्द | अव्यय | तत्सम और तद्भव शब्द | रस | छंद

Leave a comment

Your email address will not be published.